Saturday, August 21, 2010

"अनन्त"

"घास की नोक पर ओस की बूँद का ठहराव
उस बूँद पर सूरज की किरणों का ठहराव
मेरी उम्मीद का ठहराव भी है कुछ इस क़द्र
जैसे दूर शितिज़ मेरी नज़र का ठहराव"!!!!!!!!!!

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